“मुर्दों के हक पर डाका: सिद्धार्थनगर में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा अंत्येष्टि स्थल”
"शर्मनाक: जहाँ मिलती है रूह को शांति, वहां भी गूँज रहा भ्रष्टाचार का शोर"
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। महापाप: सिद्धार्थनगर में मुर्दों के ‘हक’ पर भी डाका, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े अंत्येष्टि स्थल।।
⭐”सिद्धार्थनगर का महापाप: जिन्दा गिद्धों ने नहीं छोड़ा श्मशान, कागजों में ‘महल’ धरातल पर ‘खंडहर'”
⭐”परसपुर ग्राम पंचायत: लाखों डकार गए ‘सफेदपोश’, बदहाली के आंसू रो रहा अंत्येष्टि स्थल”
⭐”अधिकारी बने धृतराष्ट्र: सिद्धार्थनगर में अंत्येष्टि स्थल निर्माण में मानकों की उड़ी धज्जियां”
⭐”जांच के नाम पर रटा-रटाया जवाब, क्या दोषियों पर चलेगा योगी सरकार का चाबुक?”
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
बांसी (सिद्धार्थनगर): भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी और संवेदनहीन हो सकती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण बांसी विकास खंड की ग्राम पंचायत परसपुर में देखने को मिल रहा है। यहाँ जीवितों के हक पर डाका डालने वाले सफेदपोशों ने अब श्मशान (अंत्येष्टि स्थल) को भी नहीं बख्शा। जीवन के अंतिम पड़ाव पर जहाँ इंसान शांति की कामना करता है, वहाँ भी भ्रष्टाचार का शोर सुनाई दे रहा है।
💫करोड़ों का बजट, कौड़ियों का काम
योगी सरकार की मंशा थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में शवदाह के समय लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए वर्ष 2024-25 में पंचायती राज विभाग द्वारा लाखों रुपये की लागत से अंत्येष्टि स्थलों का कायाकल्प शुरू किया गया। कागजों में तो यहाँ शवदाह स्थल, शांति स्थल, लकड़ी भंडार, शौचालय और स्नानघर की आधुनिक व्यवस्था दिखाई गई, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके उलट ‘बदहाली के आंसू’ बहा रही है।
💫भ्रष्टाचार की गवाही देती इमारत
परसपुर ग्राम पंचायत में बना यह अंत्येष्टि स्थल निर्माण के कुछ माह भीतर ही खंडहर में तब्दील होने लगा है।
फर्श और इंटरलॉकिंग: घटिया सामग्री के प्रयोग के कारण फर्श उखड़ने लगा है, जो निर्माण की गुणवत्ता पर चीख-चीख कर सवाल उठा रहा है।
⭐शौचालय और स्नानघर: लाखों खर्च होने के बाद भी शौचालय की स्थिति दयनीय है। हैंडपंप और गेट की हालत ऐसी है कि वे कभी भी धराशायी हो सकते हैं।
⭐जिम्मेदारों की चुप्पी: मानक विहीन निर्माण को लेकर ग्रामीण आक्रोशित हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी और ठेकेदार ‘धृतराष्ट्र’ बने बैठे हैं।
💫जांच के नाम पर सिर्फ आश्वासन?
जब इस गंभीर अनियमितता के बारे में ग्राम पंचायत सचिव उषा दुबे से बात की गई, तो उन्होंने रटा-रटाया जवाब देते हुए कहा कि वह स्वयं इसकी जांच करेंगी। सवाल यह उठता है कि जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब तकनीकी टीम और जिम्मेदार अधिकारी कहाँ थे? क्या बिना मिलीभगत के सार्वजनिक धन की ऐसी बंदरबांट संभव है?
💫भ्रष्टाचार की मुख्य कड़ियाँ
👉योजना का लक्ष्य: वर्ष 2024-25 में पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीणों की सुविधा हेतु आधुनिक अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण।
👉कागजी दावों बनाम जमीनी हकीकत: कागजों में शौचालय, स्नानघर और लकड़ी भंडार जैसी सुविधाएं पूर्ण हैं, लेकिन हकीकत में निर्माण पूरी तरह मानक विहीन है।
👉घटिया सामग्री का प्रयोग: फर्श और इंटरलॉकिंग का उखड़ना इस बात का प्रमाण है कि सामग्री की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया गया है।
खोजी नजरिया: यदि इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो जाए, तो कई रसूखदारों के चेहरे से ईमानदारी का नकाब उतरना तय है। क्या प्रशासन उन ‘जीवित गिद्धों’ पर कार्रवाई करेगा जो मुर्दों के शांति स्थल को अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना चुके हैं?














